Gayatri Mantra

gayatri mantra lyrics

gayatri mantra in hindi

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

पहला अर्थ: हम पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का ध्यान करते हैं। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की तरफ चलने के लिए परमात्मा का तेज प्रेरित करे।

दूसरा अर्थ: उस दुःखनाशक, तेजस्वी, पापनाशक, प्राणस्वरूप, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में परमात्मा प्रेरित करे।

तीसरा अर्थ: ॐ: सर्वरक्षक परमात्मा, भू: प्राणों से प्यारा, भुव: दुख विनाशक, स्व: सुखस्वरूप है, तत्: उस, सवितु: उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य: वरने योग्य, भर्गो: शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य: देव के, धीमहि: हम ध्यान करें, धियो: बुद्धि को, यो: जो, न: हमारी, प्रचोदयात्: शुभ कार्यों में प्रेरित करें।

Gayatri Mantra Video

gayatri mantra benefits

  1. जान‍िए गायत्री मंत्र का प्रभाव: गायत्री मंत्र ‘ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।’ को अत्‍यंत प्रभावी मंत्रों में से एक माना गया है। इस मंत्र का अर्थ होता है क‍ि ‘सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।’ ज्‍योत‍िषशास्‍त्र में इस मंत्र को सही समय और न‍ियमपूर्वक करने के कई फायदे बताए गए हैं।
  2. गायत्री मंत्र जप का समय: ज्‍योत‍िषशास्‍त्र में गायत्री मंत्र जप के लिए 3 समय बताए गए हैं। इसमें गायत्री मंत्र के जप का पहला समय सुबह का है। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए। मंत्र जप का दूसरा समय दोपहर का है। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। मंत्र जप का तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले का है। सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए।
  3. मंत्र जप के ल‍िए इनका रखें ध्‍यान: ज्‍योत‍िषशास्‍त्र के अनुसार यदि संध्याकाल के अतिरिक्त गायत्री मंत्र का जप करना हो। तो ऐसे में मौन रहकर या मानसिक रूप से मंत्र जप करना चाहिए। ध्‍यान रखें क‍ि इस प्रहर में मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गायत्री मंत्र जप करने के हमेशा रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना चाहिए। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। ध्‍यान रखें क‍ि घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए।
  4. उत्‍साह में होती है वृद्धि: ज्‍योत‍िषशास्‍त्र के अनुसार गायत्री मंत्र जप के कई फायदे बताए गये हैं। मान्यता है जो भी व्‍यक्ति गायत्री मंत्र का जप करता है। उसके जीवन में उत्‍साह एवं सकारात्मकता में वृद्धि होती है। इसके चलते वह खराब से खराब पर‍िस्थिति से भी बाहर न‍िकलने में कामयाब हो जाता है। इसके अलावा व्‍यक्ति का मन धर्म और सेवा कार्यों में भी लगने लगता है।

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